Thursday, August 4, 2011

Jahar Veer Goga ji(गोगा जी)


गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)

गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जाहरवीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है । राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक शहर गोगामेड़ी है। यहां भादव शुक्लपक्ष की नवमी को गोगाजी देवता का मेला भरता है। इन्हे हिन्दु और मुस्लिम दोनो पूजते है ।

वीर गोगाजी गुरुगोरखनाथ के परमशिस्य थे। चौहान वीर गोगाजी का जन्म विक्रम संवत 1003 में चुरू जिले के ददरेवा गाँव में हुआ था सिद्ध वीर गोगादेव के जन्मस्थानजो राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा ददरेवा में स्थित है। जहाँ पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं। कायम खानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं तथा उक्त स्थान पर मत्था टेकने और मन्नत माँगने आते हैं। इस तरह यह स्थान हिंदू और मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

मध्यकालीन महापुरुष गोगाजी हिंदूमुस्लिमसिख संप्रदायों की श्रद्घा अर्जित कर एक धर्मनिरपेक्ष लोकदेवता के नाम से पीर के रूप में प्रसिद्ध हुए। विक्रम संवत 1003 में गोगा जाहरवीर का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वंश के राजपूत शासक जैबर (जेवरसिंह) की पत्नी बाछल के गर्भ से गुरु गोरखनाथ के वरदान से भादो सुदी नवमी को हुआ था। जिस समय गोगाजी का जन्म हुआ उसी समय एक ब्राह्मण के घर नाहरसिंह वीर का जन्म हुआ। ठीक उसी समय एक हरिजन के घर भज्जू कोतवाल का जन्म हुआ और एक वाल्मीकि के घर रत्ना जी का जन्म हुआ। यह सभी गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य हुए। गोगाजी का नाम भी गुरु गोरखनाथ जी के नाम के पहले अक्षर से ही रखा गया।  यानी गुरु का गु और गोरख का गो यानी की गुगो जिसे बाद में गोगा जी कहा जाने लगा। गोगा जी ने गूरू गोरख नाथ जी से तंत्र की शिक्षा भी प्राप्त की थी।

चौहान वंश में राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी वीर और ख्याति प्राप्त राजा थे। गोगाजी का राज्य सतलुज सें हांसी (हरियाणा) तक था। जयपुर से लगभग 250 किमी दूर स्थित सादलपुर के पास दत्तखेड़ा (ददरेवा) में गोगादेवजी का जन्म स्थान है। दत्तखेड़ा चुरू के अंतर्गत आता है। गोगादेव की जन्मभूमि पर आज भी उनके घोड़े का अस्तबल है और सैकड़ों वर्ष बीत गएलेकिन उनके घोड़े की रकाब अभी भी वहीं पर विद्यमान है। उक्त जन्म स्थान पर गुरु गोरक्षनाथ का आश्रम भी है और वहीं है गोगादेव की घोड़े पर सवार मूर्ति। भक्तजन इस स्थान पर कीर्तन करते हुए आते हैं और जन्म स्थान पर बने मंदिर पर मत्था  टेककर मन्नत माँगते हैं।

आज भी सर्पदंश से मुक्ति के लिए गोगाजी की पूजा की जाती है. गोगाजी के प्रतीक के रूप में पत्थर या लकडी पर सर्प मूर्ती उत्कीर्ण की जाती है. लोक धारणा है कि सर्प दंश से प्रभावित व्यक्ति को यदि गोगाजी की मेडी तक लाया जाये तो वह व्यक्ति सर्प विष से मुक्त हो जाता है. भादवा माह के शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष की नवमियों को गोगाजी की स्मृति में मेला लगता है. उत्तर प्रदेश में इन्हें जहर पीर तथा मुसलमान इन्हें गोगा पीर कहते हैं।

हनुमानगढ़ जिले के नोहर उपखंड में स्थित गोगाजी के पावन धाम गोगामेड़ी स्थित गोगाजी का समाधि स्थल जन्म स्थान से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित हैजो साम्प्रदायिक सद्भाव का अनूठा प्रतीक हैजहाँ एक हिन्दू व एक मुस्लिम पुजारी खड़े रहते हैं। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा से लेकर भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा तक गोगा मेड़ी के मेले में वीर गोगाजी की समाधि तथा गोगा पीर व जाहिर वीर के जयकारों के साथ गोगाजी तथा गुरु गोरक्षनाथ के प्रति भक्ति की अविरल धारा बहती है। भक्तजन गुरु गोरक्षनाथ के टीले पर जाकर शीश नवाते हैंफिर गोगाजी की समाधि पर आकर ढोक देते हैं। प्रतिवर्ष लाखों लोग गोगा जी के मंदिर में मत्था टेक तथा छड़ियों की विशेष पूजा करते हैं।

गोगा जाहरवीर जी की छड़ी का बहुत महत्त्व होता है और जो साधक छड़ी की साधना नहीं करता उसकी साधना अधूरी ही मानी जाती है क्योंकि मान्यता के अनुसार जाहरवीर जी के वीर छड़ी में निवास करते है । सिद्ध छड़ी पर नाहरसिंह वीर सावल सिंह वीर आदि अनेकों वीरों का पहरा रहता है। छड़ी लोहे की सांकले होती है जिसपर एक मुठा लगा होता है । जब तक गोगा जाहरवीर जी की माड़ी में अथवा उनके जागरण में छड़ी नहीं होती तब तक वीर हाजिर नहीं होते ऐसी प्राचीन मान्यता है । ठीक इसी प्रकार जब तक गोगा जाहरवीर जी की माड़ी अथवा जागरण में चिमटा नहीं होता तब तक गुरु गोरखनाथ सहित नवनाथ हाजिर नहीं होते।

छड़ी अक्सर घर में ही रखी जाती है और उसकी पूजा की जाती है । केवल सावन और भादो के महीने में छड़ी निकाली जाती है और छड़ी को नगर में फेरी लगवाई जाती है इससे नगर में आने वाले सभी संकट शांत हो जाते है । जाहरवीर के भक्त दाहिने कन्धे पर छड़ी रखकर फेरी लगवाते है । छड़ी को अक्सर लाल अथवा भगवे रंग के वस्त्र पर रखा जाता है।

यदि किसी पर भूत प्रेत आदि की बाधा हो तो छड़ी को पीड़ित के शरीर को छुवाकर उसे एक बार में ही ठीक कर दिया जाता है ! भादो के महीने में जब भक्त जाहर बाबा के दर्शनों के लिए जाते है तो छड़ी को भी साथ लेकर जाते है और गोरख गंगा में स्नान करवाकर जाहर बाबा की समाधी से छुआते है । ऐसा करने से छड़ी की शक्ति कायम रहती है ।

प्रदेश की लोक संस्कृति में गोगाजी के प्रति अपार आदर भाव देखते हुए कहा गया है कि गाँव-गाँव में खेजड़ीगाँव-गाँव में गोगा वीर गोगाजी का आदर्श व्यक्तित्व भक्तजनों के लिए सदैव आकर्षण का केन्द्र रहा है।गोरखटीला स्थित गुरु गोरक्षनाथ के धूने पर शीश नवाकर भक्तजन मनौतियाँ माँगते हैं। विद्वानों व इतिहासकारों ने उनके जीवन को शौर्यधर्मपराक्रम व उच्च जीवन आदर्शों का प्रतीक माना है।

जातरु (जात लगाने वाले) ददरेवा आकर न केवल धोक आदि लगाते हैं बल्कि वहां समूह में बैठकर गुरु गोरक्षनाथ व उनके शिष्य जाहरवीर गोगाजी की जीवनी के किस्से अपनी-अपनी भाषा में गाकर सुनाते हैं। प्रसंगानुसार जीवनी सुनाते समय वाद्ययंत्रों में डैरूं व कांसी का कचौला विशेष रूप से बजाया जाता है। इस दौरान अखाड़े के जातरुओं में से एक जातरू अपने सिर व शरीर पर पूरे जोर से लोहे की सांकले मारता है। मान्यता है कि गोगाजी की संकलाई आने पर ऐसा किया जाता है।

गोरखनाथ जी से सम्बंधित एक कथा राजस्थान में बहुत प्रचलित है। राजस्थान के महापुरूष गोगाजी का जन्म गुरू गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। गोगाजी की माँ बाछल देवी निःसंतान थी। संतान प्राप्ति के सभी यत्न करने के बाद भी संतान सुख नहीं मिला। गुरू गोरखनाथ गोगामेडी’ के टीले पर तपस्या कर रहे थे। बाछल देवी उनकी शरण मे गईं तथा गुरू गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में दिया। प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और तदुपरांत गोगाजी का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से इनका नाम गोगाजी पड़ा।

जो भी इसमें अच्छा लगे वो मेरे गुरू का प्रसाद है,
और जो भी बुरा लगे वो मेरी न्यूनता है... मनीष

95 comments:

  1. Bhai JI wo shaheed nahi huye..Wo Dharti mein Jinda Samaye the for your kind Information and after 6 month they came back on earth again as Lord Shiva gave him Order.

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद इतना बढिया कमेन्ट देने का ,आभार.

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    2. jai jahar baba ki jai gogaveer ki jai guru gorakhnath ki jai guru machandranath ki

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  2. itni jankaari dene ke liye dhanaywaad ........Kishan Pal Jadaun

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद !

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    2. Bhai jaan abhi mai wahan per hokar aaya tha mai 25 saal baad gaya tha ya to mujhe meri mummy 1 saal ka tha jab gaya tha ya fir ab is saal jo mela laga usme mai 26 year ka hokar gaya tha to wahan jakar bahut hi achcha laga.

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    3. Jai ho goga jaharveer Ki jai
      Guru gorakhnath Ki jai

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  3. itni jaankari dene ke liye dhanaywaad .........Kishan Pal Jadaun

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  4. bhai ji gogga jahar peer ji shaheed nahi hue the.......weh jo jinda he nile ghore ke sath he dharti main sma gye the.........

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  5. manya manish bhai apne shri gogaji maharaj ke itihar ke bareme jo prakash dala hai atiyoga hai, gogaji jahar vir shaheed nahi hue the apni ichha Shakti se dharti me samay the,aur ek batka manme uljhan hai ki gogaji ke bareme itihas milta hai par naharsing pande,ratansing bhangi,bhajuji chakar inke jivan charitra ke bareme kuch itihas mila hi nahi

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  6. प्रिय धीरज हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं यहां आकार आपके भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार स्नेह बनाये रखे..

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    1. This comment has been removed by a blog administrator.

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  7. अभी हम व्यस्त है शीघ्र आपकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करेगे....

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  8. प्रिय धीरज...
    मैंने आर्टिकल लिखा है लिखने के लिये इतिहास की जरूरत होती है ओर रहीं परमात्मा ओर भक्ति की बात तो परमात्मा शुद्ध चेतन तत्व है, और मन-बुद्धि की पहुँच से परे है क्योंकि मन व बुद्धि जङ है, तथा आत्मा की चेतना से सक्रिय होती है । अतः किसी जड़ तत्व की पहुँच चेतन तत्व तक नही हो सकती, उससे सम्बन्ध स्थापित होना तो दूर की बात है ।

    जो भी इसमें अच्छा लगे वो मेरे गुरू का प्रसाद है,
    और जो भी बुरा लगे वो मेरी न्यूनता है.......



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  9. bahut badia jaankaari aapne likha hai gogaji ke bare main..mere yahan himachal main bhi gogaji ko puja jata hai...

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  10. प्रिय अजय हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार स्नेह बनाये रखे..

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  11. yah jankari prapt hone se mera jeevan dhanye ho gaya
    mujhhe aapki email id chahiye me kuchh vishesh apko batana chahta hun
    SARVESH KUMAR

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    1. प्रिय सर्वेश हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार स्नेह बनाये रखे..

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  12. Bhai ji apne sahi jankari di apka tahe dil se sukriya...............Anil kumar yadav mainpuri U.P.

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    1. प्रिय अनिल हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं, अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार स्नेह बनाये रखे...

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  13. Bagar bhumi ki jai ho
    Jai baba guru gorakhnath ji
    Jai baba jharveer goga ji maharaja ki jai ho

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  14. om shiv gorakh nath namo
    hari om jahar veeray namo


    jai ho nav nath ki


    from gaurav ji..

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  15. Jai baba gurugorakh nath ji maharaj ki jai ho
    Jai baba goga ji maharaj ki jai ho
    Excellent sir ji

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    1. आपका हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं

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  16. Manish Kaushal ji bahut bahut dhaynvad GURUGORAKH NATH ji par blog banne k liye

    jai GURUGORAKH NATH

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    1. आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार..

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    2. आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार..

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  17. manish ji, apki is jaankari se ab mera mann bhi param pujya goga ji maharaj ke tirth sthal ke darshan karne ko ho raha hai......hamare father sahab maharaj ji ke bhajan sunaya karte the par humain kabhi darbar main lekar nahi aa paye.....per ab main khud unke saath darbaar main darshan ko jaroor aoonga....apka bahut bahut dhanyabaad....

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki ,Jahar Veer Goga ji(गोगा जी) आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार....

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    1. Jai Jahar Veer Goga ji(गोगा जी) आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार....

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  19. Manish Ji, is bahu-mulya jankari ke liye Se-hriday dhamyawad.......
    "Jai Guru Gorakhnath Ji ki"
    "Jai jahar veer Goga ji ki"

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  20. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji(गोगा जी) अभिषेक जी आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार....

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  21. Thanks Manish...
    Apki ye information kisi ke shradha or vishvas ke liye boht helpful hai.
    Or life me bina vishvas kuch b nahi .

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  22. Thanks Manish...
    Apki ye information kisi ke shradha or vishvas ke liye boht helpful hai.
    Or life me bina vishvas kuch b nahi .

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji(गोगा जी) नितिन जी आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार.

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  23. main or mera pura parivaar goga ji main bahut aastha rakhte hain humne jo maanga hume mila. goga ji ki aastha sachhe man se karo sari murade puri hoti hain,

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji (गोगा जी) लोकेश जी आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार.

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  24. मनीष जी, आपने अच्छा लिखा।
    कुछ त्रृटियां हैं कोशिश करे, उन्हें भी ठीक किया जावे,
    और सन्दर्भ सूचि अवश्य डाले,
    ताकि कथन की पृष्टि हो सके।
    धन्यवाद।

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  25. आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार..

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  26. Mujh per baba guru gorakh nath ki meher ho gaye.

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  27. JAI BABA GOGAJI MAHARAJ, AND JAI BABA GURU GORKHNATH JI KI.
    I LIKE YOUR REVIEW FOR GOGAJI MAHARAJ. I ALSO A admirer OF GOGAJI MAHARAJ. AND BABA GOGAJI IS CHANGE ME LIFE. I AM THANKFUL TO BABA GOGAJI .
    JAI BABA GOGAJI MAHARAJ.

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji (गोगा जी) आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार...

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  28. jai guru gorakhnath ki,jai baba goga maidi wale ki

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji (गोगा जी)

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  29. To All Gugga Peer Ji Ke Bhakton,
    waise too mein naastik hoon , but mene bahut logo se Gugga Peer ji ke baare mein suna hai , me aap sab se request karta hu ki agar aapke gugga Peer ji mujhe apni shakti diikhaye too me umar bhar ke liye unka bhakat ban jaaunga aur aastik ho jaaunga,
    i m unemployee for > 1 year and i am trying to search job abroad , i want to be settle in uae or oman permanently , financially strong , having my own 2 houses , and many more in life.

    agar aap sab ke Gugga peer ji me taaqat hai , too meri khawahish poori kar de jaldi ,

    nahi too me maan lunga ki aapke Gugga Peer Ji me koi shakti nahi ,
    please reply or advise me to
    narenderhbsingh@gmail.com

    gugga peer ji mujhe bhi deekhaao apni shakti ,

    fir jaisa aap kahenge me waisa hi karooga ,


    i m waiting gugga peer ji ,
    thank you
    narender h b singh

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  30. Thanking u manishji
    The information u given to us @ Gogaji
    I think this is very helpful to me in my life.......
    Thank u so mush.....
    I pray to god Jahar veer Gogaji to complete everyone's blessing & change a life of a person who pray from bottom of the heart.

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    1. Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji(गोगा जी) सागर जी आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार.

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  31. Jai baba jaharveer ki
    i would thank manish for providing such a valuable information. i also want to add few things to the same.


    Gogajee is believed to born by blessings of Guru Gorakhnath, who gave 'Gugal' fruit as a prasad to gogga's mother Bachhal. Since the fruit of Guggal was cause of his birth, he was referred as Gogga. Whereas devotees call him goggajee respectfully. adding the suffix 'Ji' or 'Jee' to the original name 'Goagga'. Another belief is that he was called Goga jee because of his remarkable service to cows(Gou in Sanskrit).

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  32. MY SELF BALBIR FROM SIKAR
    Gugga (also pronounced as Gogga,Goga) or Jahar Vir, one of the snake-kings, and a Chauhan Rajput, had a kingdom called Bagad Dedga near Ganganagar that spanned over to Hansi near Hisar in Haryana and included territory up to the river Sutlej in Punjab.[1] Gugga is worshipped in Rajasthan, Uttarakhand, Haryana, Punjab, Uttar pradesh, Madhya Pradesh Maharashtra, Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir and Gujarat. In Gujarat, an annual procession is held in honor of the great warrior. Rabari community in Gujarat and Rajasthan is great believer in Gogaji.

    A clan of Rajputs, Bachal Rajputs, is said to get the name from queen Bachal, who was mother of famous folk-deity Jaharveer Gogaji.[2] Gogaji, according to legend, was the son of a Chauhan Rajput Ruler named Jewar, whose wife Bachal was from Tuar clan. Gogaji was born upon blessings given to Queen Bachal by Guru Gorakhnathji.[3] Bachal Rajputs, who worship him as Kuldevta can be found in the states of Rajasthan, Gujarat, Madhya Pradesh.

    Legend

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  33. Gogaji was born to queen Bachchal and king Zewar in Dadrewa in the Churu district of Rajasthan. The earliest parts of Gogaji's life were spent in the village of Dadrewa, situated on Hissar—Bikaner highway in Sadulpur tehsil of Churu districtin Rajasthan. He was born as a member of the Chauhan Clan to the rulers of this area, Jewar Chauhan and Queen Rani Bahcal around 900 AD.[4]

    When Queen Bachal was worshipping the Gorakhanath (Hindu Nath yogi), her twin-sister decided to usurp the blessings from the Guru Gorakhnath. In the middle of the night, she wore her sister's clothes and deceived the Guru into giving her the blessing fruit. When Rani Bachal came to know about it, she rushed to Guru Gorakhnath and said that she had not received anything. To this, the Guru replied that he had already given his blessings and said that her sister was attempting to deceive her. After lots of asking from Rani Bachal, the Guru relented and gave her two Gugal candies. She distributed these candies to ladies having no child, including the 'blue mare' who was pregnant at that time.

    When the Guru gave the blessing to Rani, he foretold that her son would become very powerful and would rule over the other two sons of her aunt Rani kachal.

    He was married to Shreeyal Roz who was daughter of Tandul Nagari's King Sindha Singh. When Goga ji came to know that his cousin brothers Arjan and Sarjan were attracted to Shreeyal and had an ill will for her,he killed both his cousins and informed his mother, who became very angry and decided not to ever see her son's face again.

    Another story is that Arjan and Sarjan were against Gogaji and was a part of conspiracy with king Anganpal of delhi. King Anganpal attacked bagad with arjan and sarjan.Both of them were killed by Jaharveer gogaji. Gogaji spare the king after his miserere.

    Kingdom[edit]
    The territory of this great ruler extended from Hansi to Garra(Ghara) and his capital was Mahera on that river. In a quarrel about land he killed his two brothers on which account he drew upon himself the anger of his mother.[5]

    Worship[edit]
    Gogaji is popular as a Devta who protects his followers from snakes and other evils. Almost every village in Rajasthan has a Than (sacred place,generally a small temple) dedicated to him.

    His shrine, referred as medi, consists of a one-room building with a minaret on each corner and a grave(Mazar) inside, marked by a Nishan( A symbol, a sign), which is made up of a long bamboo with peacock plumes, a coconut, some colored threads and some handpankhas with a blue flag on the top.

    On the 9th of Bhadra, the people worship his symbol, a black snake painted on a wall. Worshippers take a fly-flap, known as chhari, round the village. Devotees pay their respect to it and offer churma. The Savayians sing devotional songs known as ‘Pir ke Solle’ in his honour to the accompaniment of deroos. Beating of deroos is the exclusive priviege of the Savayian community; others may sing, dance or offer charhawa. It is believed that the spirit of Gugga temporarily takes abode in the devotee dancer who lashes himself with a bunch of iron chains. People also open their rakhis on this day(bhadra krishna paksh navmi) and offer them to him.They also offer mithi puri(a type of sweet chappati) and other sweets and take his blessing.

    Fairs.

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  34. Worship of gogaji starts in Bhaadra month of Hindu calendar. Grand fairs are held at his birthplace and Smadhi sathal Gogamedi. Gogamedi is 359 km from Jaipur, in Hanumangarh district of Rajasthan. It is believed that Gogaji went into samādhi at Gogamedi. Thousands of devotees gather to pay homage at this memorial annually in the month of Bhadrapada during the Gogaji fair, which lasts for 3 days. The fair is held from the ninth day of the dark half of Bhadrapada (Goga Navami) to the eleventh day of the dark half of the same month.

    It is quite a sight to see people singing and dancing to the beats of drums and songs with multicolored flags called nishans in their hands. The songs and bhajans on the life history of Gogaji are recited accompanied by music played with traditional instruments like Damru, Chimta, etc. At his birthplace Dadrewa fair goes on over a month. Devotees from far eastern places of Dadrewa start arriving from the beginning of the auspicious month of Bhaadra. These devotees are commonly known as purbia (those who belong to east).

    It is a common sight to see people with snakes lying around their nakes. It is common belief among devotees that Gogaji will protect them from snakes. According to a folklore in and around his birthplace Dadrewa it is believed that if someone picks up even a stick from johra ( a barren land which has a sacred pond in Dadrewa),it would turn into a snake. Devotees of Gogaji worship him when they get a snake bite and apply sacred ash (bhabhoot) on the bite as an immediate remedy.

    In Thaneek Pura, Himachal Pradesh, a very large scale festival and fair is organized on Gugga Navami. The tale of Gugga Ji is recited, from Raksha Bandhan to Gugga Naumi, by the followers who visit every house in the region. These followers while singing the tales of Gugga Ji carry a Chhat (a wooden umbrella) and people offer them grains and other stuff. They bring all the collected offerings to the temple and then the grand festival of Gugga Navami is celebrated for three days. Apart from various pujas and rituals, the wrestling competition (Maali or Dangal) is organized for three days where participants from all over the region compete. The annual three day fair is also a part of these festivities where people come and enjoy great food, and shop for decorative items, handicrafts, clothes, cosmetics, household goods, and toys for children.

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  35. Gogaji is popular as a Devta who protects his followers from snakes and other evils. Almost every village in Rajasthan has a Than (sacred place,generally a small temple) dedicated to him.

    His shrine, referred as medi, consists of a one-room building with a minaret on each corner and a grave(Mazar) inside, marked by a Nishan( A symbol, a sign), which is made up of a long bamboo with peacock plumes, a coconut, some colored threads and some handpankhas with a blue flag on the top.

    On the 9th of Bhadra, the people worship his symbol, a black snake painted on a wall. Worshippers take a fly-flap, known as chhari, round the village. Devotees pay their respect to it and offer churma. The Savayians sing devotional songs known as ‘Pir ke Solle’ in his honour to the accompaniment of deroos. Beating of deroos is the exclusive priviege of the Savayian community; others may sing, dance or offer charhawa. It is believed that the spirit of Gugga temporarily takes abode in the devotee dancer who lashes himself with a bunch of iron chains. People also open their rakhis on this day(bhadra krishna paksh navmi) and offer them to him.They also offer mithi puri(a type of sweet chappati) and other sweets and take his blessing.

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  36. NEELO GHODO NAVAL KO TO MOTIAYA JADI LAGAM
    ARE NILE GHODE PAR CHAD JAHARVEER NISRYA TO THANE DUNIYA BHARE SLAAM.

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  37. mai aap logo ko bata na chahata hu ki mere pure pariwar par gogaji maharaj ki bahut badi kirpa hai. humara sare kam unke naam matra se pure sidh ho jate hai. jharveer gogaji ne khud mere nana ji ko wardaan diya ki tum meri bhakti karo . jiske wajah se aaj pura sansar gogaji aur hamare nanaji ki pooja karte hai.. hamare yaha googaji ka bahut badi goga medi hai . jaja har varsh badhva ke asthami ko jagarna lagta hai.
    jai gogaji maharaj ki ..
    jai baghat likhmaram ji mhahraj ki..

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  38. KHUL GAYA SAJAN KIWAD RE BAGAD KE RAJA TERA HI UMAVA
    LAGAYO UMAVO GOGAJI THARO LAGYAO UMAVO ....

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  39. mai aap logo ko bata na chahata hu ki mere pure pariwar par gogaji maharaj ki bahut badi kirpa hai. humara sare kam unke naam matra se pure sidh ho jate hai. jharveer gogaji ne khud mere nana ji ko wardaan diya ki tum meri bhakti karo . jiske wajah se aaj pura sansar gogaji aur hamare nanaji ki pooja karte hai.. hamare yaha googaji ka bahut badi goga medi hai . jaja har varsh badhva ke asthami ko jagarna lagta hai.
    jai gogaji maharaj ki ..
    jai baghat likhmaram ji mhahraj ki..

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  40. NEELO GHODO NAVAL KO TO MOTIAYA JADI LAGAM
    ARE NILE GHODE PAR CHAD JAHARVEER NISRYA TO THANE DUNIYA BHARE SLAAM.

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  41. ` baba` ji` nile` gude` ke` sath` jameen` me` samay` tha`

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  42. sari jankari ke liye dhanyawad

    men bhi Goga Medi gaya tha or sab jankari li

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    1. आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार.
      Jai Guru Gorakhnath ji ki Jai Jahar Veer Goga ji

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  43. jaharveer ji ke pita ji kanam to sabhi jante h pr narsingh pande or bhajukotabal or ratna ji ke pita ji ka koi nam nahi janta ydi kiso bhai ko pata ho to mujhe bataye vijay bhardwaj

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    1. अभी हम व्यस्त है शीघ्र आपकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करेगे..

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  44. jai jahar baba ki jai gogaveer ki jai guru gorakhnath ki jai guru machandranath ki

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  45. jai jahar baba ki jai gogaveer ki jai guru gorakhnath ki jai guru machandranath ki

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    1. जय गुरु गोरखनाथ जी की..
      जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की...

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  46. GOGAJI KE VIVAH KA ITIHAS KAHAN KAHAN PAR RUKE ISKI JANKARI CHAHIYE.

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    1. अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार...अभी हम व्यस्त है शीघ्र आपकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करेगे

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    2. गोगा के वैवाहिक जीवन के संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों का अभाव है। लोक-कथाओं में उनकी पत्नियों के रूप में राणी केलमदे व राणी सीरियल के नामों का उल्लेख है।

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  47. JAI HO GURU MACHHANDARNATH BABA KI JAY HO,
    JAI HO GURU GORAKHNATH BABA KI JAY HO,
    JAI HO GURU JAHARVEER BABA KI JAY HO,

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    1. जय बाबाजी की...

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    2. जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की

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  48. hi bhakto mai bhi jaharveer ka bahut accha bhakt hu अथवा मेरे सारे परिवार मैं इनकी कृपा बनी रही जय बाबा की/7217204085. S.thakur

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  49. Please koi batayga baba ji ka ghoda(horse) neela(blue) kyo hai.....?

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    1. बाबा जी जिस घोड़े पर सवारी करते थे,वह एक दुर्लभ प्रजाति का नीले रंग का घोड़ा था..जिसका जन्म गुरू गोरखनाथ के वरदान से हुआ था।

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  50. Is lekh ko likhne ke liye, AABHAR

    Jaykara Guru Gorakhnath ka
    Bol Sachche darbar Ki, Jay
    Jaykara Maa kalaka devi ka
    Bol Sachche darbar ki, Jay

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    1. अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार..जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की...

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  51. Replies
    1. जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की....

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  52. Replies
    1. जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की

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  53. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार...जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज गोगादेव जी की

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  54. आपकी टिपण्णी में यह स्पष्ट नही हुआ कि मुस्लिम गोगा पीर बाबा को क्यूँ पूजते हें इसके पीछे क्या घटना हे।

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    1. हिन्दू से मुसलमान बने कायमखानी वास्तव में चैहान कायमसी या करमचन्द की सन्तान हैं ये गोगाजी को अपना पूर्वपुरुष मानकर पूजते हैं। संभवतः उनके अनुकरण पर अन्य कई नव मुस्लिम जातियाँ (जैसे गुजरात के गूजर) भी उन्हें पूजने लगे।

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  55. itni achi jankari dene k liye dhanyabad

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    1. आपकी टिप्पणि बहुमूल्य हैं,अपने भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार...जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज गोगादेव जी की

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  56. Replies
    1. जय गुरु गोरखनाथ जी की.. जय गोगाजी महाराज( सिद्धनाथ वीर गोगादेव)जी की

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